Art and Culture
गुरू को समर्पित संध्या में झलका कला के प्रति 25 वर्ष का समर्पण!!
08/10/2018
नई दिल्ली: छह अक्टूबर की शाम राजधानी के सांस्कृतिक कला प्रेमियों के लिए नया अनुभव लेकर आई। नाट्य वृक्ष की संस्थापक-अध्यक्ष पद्मश्री गीता चंद्रन की शिष्या देविका राजारमन ने भरतनाट्यम पर अपनी प्रस्तुति से लोगों को मुग्ध कर दिया। चिन्मय मिशन ऑडिटोरियम में हुई इस प्रस्तुति के दौरान उपस्थित दर्शकों ने देविका की आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुति की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। गीता चंद्रन ने नट्टुवंगम, के. वेंकटेश्वरन ने वोकल, मनोहर बलातचंदीरेन ने मृदंग और जी. राघवेंद्र ने वायलिन वादक के रूप में सहयोगी कलाकारों की भूमिका निभाते हुए प्रस्तुति को मनमोहक बनाया।

देविका की इस प्रस्तुति में भरतनाट्यम के प्रति उनके 25 वर्ष का समर्पण झलक रहा था। साथ ही यह कला के क्षेत्र में उनकी यात्रा का नया पड़ाव बनकर भी सामने आया। अपनी प्रस्तुति का प्रारंभ उन्होंने पुष्पांजलि से किया। अपनी प्रस्तुति का प्रारंभ उन्होंने पुष्पांजलि से किया, जो देवताओं के लिए फूलों की पेशकश है, इसके बाद भगवान शिव को मनाता श्लोकम प्रस्तुत किया। इसके उपरांत देविका ने वर्णम प्रस्तुत किया, जो भरतनाट्यम प्रदर्शन में केन्द्रीय पीस है। उनकी अगली प्रस्तुति रही तेलुगू में सुब्बरमा दीक्षिथार पादम। जिविष्णववी संत तिरुमांगी अलवर द्वारा लिखित दिव्य प्रभंदम पासूरम में छंद के बाद राग हिंदोलम में एक तिलाना के साथ अपने शानदार प्रस्तुतिकरण को विराम दिया।

 




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