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देश की आधी आबादी चाहती है कि 2019 चुनावों के केंद्र में हों महिलाओं से जुड़े मुद्दे
31/01/2019
• दिल्ली के कमला नेहरू कॉलेज में Change.org द्वारा आयोजित #SheVotes कार्यक्रम में रिलीज़ हुआ सर्वे • सर्वे में सामने आया कि आम नागरिक, राजनीति में महिलाओं को और ज़्यादा अवसर देने के पक्ष में • महिलाओं के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है देश में उनके प्रति बढ़ती हिंसा और अपराध • 2019 चुनावों से पहले पुरुषों की सबसे बड़ी मांग है नौकरी और अर्थव्यवस्था का विकास • सर्वे में देश के विभिन्न राजनीतिक दलों की महिला नेताओं ने हिस्सा लिया और राजनीति में महिलाओं के लिए अवसर तथा चुनौतियों पर अपनी बात रखी

Change.org के पहले राष्ट्रव्यापी सर्वे #SheVotes में खुलासा हुआ कि भारी संख्या में लोग, राजनीति में महिलाओं को बढ़ावा देने, और ज़्यादा महिला उम्मीदवारों को मौकादेने के पक्ष में हैं। महिलाएं और पुरुष, दोनों ने सर्वे में जवाब दिया कि वो उन महिला उम्मीदवारों के लिए ज़रूर वोट करेंगे जो उनके हिसाब से दक्ष हैं।

 

सर्वे में हिस्सा लेने वाले ज़्यादातर लोगों का मानना था कि भारतीय संसद में महिलाओं का नेतृत्व कम है, जबकि महिलाओं को लेकर आम राय ये है कि वो “जनता कीसमस्याओं को और बेहतर तरीके से सुनती और समझती हैं।”

 

देशभर से Change.org के 20,000 से भी ज़्यादा यूज़र्स ने सर्वे में हिस्सा लिया। जिसके नतीजे, दिल्ली के कमला नेहरू कॉलेज में आयोजित #SheVotes कार्यक्रम में दिखाएगए। इस कार्यक्रम में देश की बड़ी पार्टी की महिला नेताओं ने महिलाओं के राजनीतिक सफर की कठिनाइयों और मौकों पर चर्चा की।

 

कार्यक्रम में ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष, सुष्मिता देव ने कहा, “राजनीति में महिलाओं की भूमिका को अहमियत मिलनी चाहिए--वोटर के तौर पर भी और नेता केतौर पर भी। स्वाभाविक तौर पर महिलाएं नेता होती हैं। हम राजनीति में महिलाओं को और मौके देने के लिए कांग्रेस शासित सभी राज्यों में उन्हें 33% आरक्षण देने की दिशा मेंकाम कर रहे हैं।”

 

श्वेता शालिनी, प्रवक्ता, भारतीय जनती पार्टी ने कहा, “न्यायसंगत लोकतंत्र वो नहीं जहाँ महिलाओं को बस चुनने का अधिकार हो। बल्कि न्यायसंगत लोकतंत्र वो है जहाँमहिलाओं के पास चुने जाने के भी एकसमान अवसर हों। समय की मांग है कि राजनीति में महिलाओं का और ज़्यादा नेतृत्व हो और कोई इससे मुंह नहीं फेर सकता।”

 

Change.org की कंट्री डायरेक्टर निदा हसन ने बताया, “Change.org का #SheVotes सर्वे दर्शाता है कि महिलाएं, नेताओं से सीधा संवाद स्थापित करना चाहती हैं, पर वोअभी भी आमने-सामने बैठकर बात करने में हिचकिचाती हैं। वो ऑनलाइन पेटीशन के माध्यम से जनता के प्रतिनिधियों से जुड़ती हैं। हमारा सर्वे ये भी दर्शाता है कि लैंगिक मुद्देआने वाले आम चुनावों में कितना महत्व रखेंगे।”




सर्वे के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े

 

2019 के आम चुनावों के लिए महिलाओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है लैंगिक न्याय, पर्यावरण, स्वतंत्रता एवं मानसिक स्वास्थ्य। वहीं दूसरी ओर पुरुषों की प्राथमिकताएं हैं--भ्रष्टाचार पर लगाम, नौकरी के और मौके, सड़क एवं इंफ्रास्ट्रक्चर।

 

लैंगिक मुद्दों में 5 सबसे बड़े मुद्दे कुछ इस प्रकार हैं:

 

1. महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा और अपराध

2. धर्म, शिक्षा और शादी में महिलाओं को स्वतंत्रता

3. माहवारी से जुड़ी सेवाएं

4. बच्चियों की शिक्षा

5. गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य और नवजात बच्चों की मृत्यू

 

महिलाओं और पुरुषों ने किस मुद्दे के लिए किया कितना वोट?

 

महिलाओं के लिए लैंगिक मुद्दे, पुरुषों से कहीं ज्यादा महत्व रखते हैं।

‘महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा’ और अपराध महिलाओं के लिए नंबर 1 मुद्दा रहा। वहीं पुरुषों के लिए ये मुद्दा 15वें स्थान पर रहा।

‘मैरिटल रेप’ लगभग 31% महिलाओं के लिए एक मुद्दा था, जिसको 25वां स्थान प्राप्त हुआ। पुरुषों के लिए ये मुद्दा 37वें स्थान पर रहा, जहाँ करीब 16% पुरुषों ने इसकेलिए वोट किया।

40% महिलाओं ने ‘चुनने की स्वतंत्रता’ पर वोटकर इसे अपने लिए 11वां स्थान दिया। महिलाओं के लिए धर्म, शिक्षा और शादी में स्वतंत्रता एक बड़ा मुद्दा है। पुरुषों केलिए ये मुद्दा 27वें स्थान पर है

 




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